खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों हेतु सरकारी योजना I 35 प्रतिशत की छूट के साथ I प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME)
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME): सूक्ष्म उद्यमों का संबल
भारत कृषि प्रधान देश है, और यहाँ का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) एक क्रांतिकारी पहल है. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित खंड में मौजूदा निजी सूक्ष्म उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने, Formalization को प्रोत्साहन देने तथा किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और उत्पादक सहकारिताओं को ऊनि संपूर्ण मूल्य श्रृखला के लिए सहायता हेतु खाद्य उद्योग प्रसंस्करण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) प्रारंभ की गयी है. इस योजना की शुरुआत 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत वर्ष 2020 में की गई थी। आइए विस्तार से जानें कि यह योजना क्या है और इससे उद्यमियों को कैसे लाभ मिलता है।
योजना का उद्देश्य :
PMFME योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित खाद्य
प्रसंस्करण क्षेत्र को व्यवस्थित करना और छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाना है।
यह योजना “एक जिला एक
उत्पाद” “One District
One Product” (ODOP) के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें प्रत्येक जिले में एक विशेष खाद्य उत्पाद को बढ़ावा दिए
जाने हेतु चिन्हित किया जाता है. आवेदक एक जिला एक उत्पाद (ODOP) से भिन्न खाद्य उत्पादों (उदा. बेकरी, मशाला उद्योग,
खाद्य तेल, नूडल्स, दाल मिल, गुड निर्माण, चाय पत्ति, राइस मिल, पोहा मिल, मुरमुरा
उद्योग, डेयरी उत्पाद, आचार, पापड़, बडी, जैम, जैली, कैच-अप, सौस आदि.) हेतु भी
आवेदन कर सकता है.
इस योजना के
प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- स्थानीय खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाना।
- परंपरागत खाद्य उत्पादों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना।
- रोजगार के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की गुणवत्ता में सुधार करना।
परियोजना का अधिकतम आकार (ऋण की अधिकतम सीमा) :
- व्यक्तिगत : रु. 100.00 लाख तक
- SHG सदस्यों की व्यक्तिगत इकाई : रु. 100.00 लाख तक
- फेडरेसन (FPO/SHG/Co-Operatives) : रु. 1000.00 लाख तक
शैक्षणिक योग्यता :
PMFME योजना के अंतर्गत आवेदन हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है.
आवेदन करने की आयु सीमा क्या है :
आवेदन दिनांक को आवेदक को न्यूनतम 18 वर्ष की आयु सीमा पूर्ण होनी चाहिए.
बैंक ऋण की राशी :
बैंक/वित्तीय संस्थाएं आपके परियोजना के स्थायी पूंजी निवेश का 90 प्रतिशत तथा कार्यशील पूंजी का 80 प्रतिशत तक राशी स्वीकृत करेगा.
स्वयं का अंशदान :
आवेदन को स्थायी पूंजी निवेश का न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा कार्यशील पूंजी का न्यूनतम 20 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होगा.
योजना के अंतर्गत शासकीय अनुदान (सब्सिडी) :
- Ø व्यक्तिगत ऋण :
o स्वीकृत पूंजीगत लागत
का 35 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशी रु. 10.00 लाख तक अनुदान दिया जावेगा.
- Ø स्वयं सहायता समूह (SHG) :
o
कार्यशील पूंजी तथा छोटे औजारों की खरीद के लिए प्रत्येक
सदस्य को रु.40000.00 की दर से प्रारंभिक पूंजी दिए जाने का
प्रावधान है.
o
सदस्यों की व्यक्तिगत इकाई पर पूंजीगत लागत का 35 प्रतिशत
की दर से अधिकतम राशी रु. 10.00 लाख तक अनुदान दिया जावेगा
o फेडरेसन द्वारा
स्थापित इकाई पर पूंजीगत लागत का 35 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशी रु. 300.00 लाख
तक अनुदान दिया जावेगा
- Ø
किसान उत्पादक संगठन (FPO) :
o स्वकृत पूंजीगत
लागत का 35 प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जावेगा
o सामान्य सुविधा केंद्र (Common facility Centre) स्थापित करने हेतु 35 प्रतिशत की दर से पूंजीगत अनुदान दिया जायगा.
सामान्य उदभवन केंद्र (Common Incubation Centre) स्थापित करने के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान दिया जायेगा.
ऑनलाइन आवेदन के साथ अपलोड किये जाने वाले दस्तावेओं की
सूची :
१.
आधार कार्ड
२.
पते का प्रमाण पत्र
३.
बैंक पासबुक/छ: माह का बैंक स्टेटमेंट
४.
पैन कार्ड
५. मशीनरी/उपकरण का कोटेशन
6. अन्य उपलब्ध दस्तावेज
योजना के अंतर्गत निषिद्ध गतिविधियों की सूची :
1. अप्रसंक्रित खाद्यानो, दूध, लघु वनोपज की विक्री
2. फलो एवं सब्जियों की विक्री
3. मधुमक्खी पालन
4. मछली /मीट /चिकन आदि की विक्री
5. विनिर्मित उत्पादों की रि-पैकिंग
6. कैंटीन, किरण दुकान, होटल या अन्य खाद्य सेवा उद्यम.
योजना के अन्य लाभ
PMFME योजना के तहत सरकार कई प्रकार की सहायता
प्रदान करती है, जिससे छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसाय को
बढ़ाने में मदद मिलती है।
- तकनीकी सहायता:
- खाद्य प्रसंस्करण में नवीनतम
तकनीकों और उपकरणों की जानकारी दी जाती है।
- पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए
विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
- प्रशिक्षण और कौशल विकास:
- उद्यमियों को आधुनिक व्यापार
तकनीकों और गुणवत्ता नियंत्रण के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है।
- उन्हें जीएसटी, लाइसेंसिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की
ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- बाजार तक पहुँच:
- सरकार ODOP के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को
अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने में मदद करती है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष योजनाएँ और बाजार कनेक्टिविटी प्रदान करती है।
योजना के अंतर्गत आवेदन कैसे करें :
PMFME योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक उद्यमी https://pmfme.mofpi.gov.in/ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं अथवा अपने जिले के जिला
श्रोत व्यक्ति (District Resource Person) से संपर्क कर उनसे सहायता ले सकते हैं।
योजना की सम्पूर्ण प्रक्रिया में सहायता हेतु District Resource Person की नियुक्ति की गई है. आवेदन प्रक्रिया
निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:
- पोर्टल पर पंजीकरण करें।
- व्यक्तिगत या सामूहिक श्रेणी के
अनुसार आवेदन भरें।
- आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।
- बैंक और सरकारी विभाग द्वारा आवेदन की समीक्षा की जाती है।
- स्वीकृति मिलने के बाद वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
योजना का लाभ कौन उठा सकता है ?
इस योजना का लाभ
निम्नलिखित व्यक्ति या संगठन उठा सकते हैं:
- सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- सहकारी समितियाँ
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- व्यक्तिगत उद्यमी
निष्कर्ष
PMFME योजना भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को
नई ऊँचाइयों पर ले जाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह न केवल सूक्ष्म उद्यमों को
वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें
आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुँच भी उपलब्ध
कराती है। इस योजना के माध्यम से 'लोकल से ग्लोबल' की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सशक्त और आत्मनिर्भर
बन सके।
अगर आप भी खाद्य
प्रसंस्करण व्यवसाय में प्रवेश करना चाहते हैं, तो PMFME योजना का लाभ उठाएँ और अपने सपनों को
साकार करें।
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